नेपालमा संसद विघटनको इतिहास
- नेपालको संसदीय इतिहासमा हालसम्म १० पटक संसद् विघटनका प्रयासहरू भएका,
- ५ पटक विघटन कार्यान्वयन भएको छ भने ५ पटक असफल (अदालतबाट बदर वा राजाबाट अस्वीकृत) भएका,
संसद् विघटनको संक्षिप्त तालिका:
| सि.नं. | प्रधानमन्त्री | विघटन सिफारिस मिति | परिणाम | मुख्य कारण/अवस्था |
| १ | बीपी कोइराला | २०१७ पुस १ | कार्यान्वयन | राजा महेन्द्रको 'कु', पञ्चायती व्यवस्थाको सुरुवात, |
| २ | गिरिजाप्रसाद कोइराला | २०५१ असार २६ | कार्यान्वयन | नीति तथा कार्यक्रम फेल भएपछि मध्यावधि निर्वाचन, |
| ३ | मनमोहन अधिकारी | २०५२ जेठ ३० | असफल | सर्वोच्चद्वारा २०५२ भदौ १२ मा पुनःस्थापना, |
| ४ | सूर्यबहादुर थापा | २०५४ माघ २४ | असफल | राजाद्वारा सर्वोच्चको रायअनुसार सिफारिस अस्वीकृत, |
| ५ | गिरिजाप्रसाद कोइराला | २०५५ माघ १० | कार्यान्वयन | एमालेसँगको सहमतिमा 'अर्ली इलेक्सन'का लागि, |
| ६ | शेरबहादुर देउवा | २०५९ जेठ ८ | कार्यान्वयन | संकटकाल र पार्टी विवाद; पछि राजाको प्रत्यक्ष शासन, |
| ७ | बाबुराम भट्टराई | २०६९ जेठ १४ | कार्यान्वयन | पहिलो संविधानसभाले संविधान दिन नसकेपछि विघटन, |
| ८ | केपी शर्मा ओली | २०७७ पुस ५ | असफल | सर्वोच्चद्वारा २०७७ फागुन ११ मा पुनःस्थापना, |
| ९ | केपी शर्मा ओली | २०७८ जेठ ८ | असफल | सर्वोच्चद्वारा २०७८ असार २८ मा पुनःस्थापना, |
| १० | सुशीला कार्की | २०८२ भदौ २७ | विचाराधीन | जेन-जी आन्दोलनपछिको सरकार; न्यायिक परीक्षण बाँकी, |
- विगतका प्रमुख विघटनहरूमा सर्वोच्च अदालतले मुद्दा दर्तादेखि फैसलासम्म लिएको समय निम्न छ:
- मनमोहन अधिकारी (२०५२): मुद्दा दर्ता (असार ६) देखि फैसला (भदौ १२) सम्म करिब ६७ दिन,
- गिरिजाप्रसाद कोइराला (२०५१): मुद्दा दर्ता (साउन ११) देखि फैसला (भदौ २७) सम्म करिब ४७ दिन,
- केपी शर्मा ओली (२०७७): मुद्दा दर्ता (पुस ८) देखि फैसला (फागुन ११) सम्म करिब ६४ दिन,
- केपी शर्मा ओली (२०७८): मुद्दा दर्ता (जेठ १०) देखि फैसला (असार २८) सम्म करिब ४८ दिन,